शनिवार, मई 2, 2026
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उपराष्ट्रपति धनखड़ के इस्तीफे के पीछे क्या है बड़ी कहानी? विपक्ष बोला- मामला सिर्फ सेहत का नहीं, कुछ और गड़बड़ है

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का इस्तीफा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को मंजूर कर लिया। वो न तो संसद पहुंचे और न ही विदाई समारोह में शामिल होंगे। ये फैसला एकदम अचानक सामने आया, जिससे राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है।

BAC बैठक में हुए घटनाक्रम से शुरू हुई उलझन

21 जुलाई को दिन में उपराष्ट्रपति धनखड़ ने राज्यसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की अध्यक्षता की थी। बैठक में जेपी नड्डा और किरेन रिजिजू जैसे नेता भी शामिल थे। बातचीत के बाद तय हुआ कि अगली बैठक शाम 4:30 बजे होगी, लेकिन तब दोनों बड़े नेता पहुंचे ही नहीं। सबसे चौंकाने वाली बात ये थी कि उपराष्ट्रपति को इसकी जानकारी भी नहीं दी गई।

विपक्ष बोला- बात सिर्फ सेहत की नहीं, कुछ बड़ा छिपा है

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि दोपहर से शाम के बीच कुछ ऐसा हुआ जो उपराष्ट्रपति को बहुत खल गया। ये इशारा करता है कि इस्तीफे के पीछे असली वजह कुछ और है। कांग्रेस के कई अन्य नेताओं ने भी कहा कि बात केवल सेहत की नहीं है।

धनखड़ पहले उपराष्ट्रपति जिनके खिलाफ लाया गया महाभियोग

देश के 72 साल के संसदीय इतिहास में जगदीप धनखड़ पहले ऐसे उपराष्ट्रपति रहे जिनके खिलाफ दिसंबर 2024 में महाभियोग प्रस्ताव आया था। हालाँकि वो तकनीकी कारणों से खारिज हो गया, लेकिन विपक्ष लगातार आरोप लगाता रहा कि धनखड़ सत्ता पक्ष के प्रति पक्षपाती हैं।

धनखड़ के तीखे बयान हमेशा चर्चा में रहे

उपराष्ट्रपति रहते हुए धनखड़ ने कई बार बेहद तीखे बयान दिए। ममता बनर्जी पर हमला हो या कोर्ट की आलोचना, उन्होंने बिना लाग-लपेट बात रखी। यहां तक कि उन्होंने संविधान की प्रस्तावना में किए गए बदलाव को ‘नासूर’ कह दिया था। यही नहीं, कोचिंग सेंटरों को ‘पोचिंग सेंटर’ बता चुके हैं।

 Nationalbreaking.com । नेशनल ब्रेकिंग - सबसे सटीक
  1. धनखड़ ने 21 जुलाई की रात अचानक इस्तीफा दे दिया, जो 10 अगस्त 2027 तक पद पर रहने वाले थे।
  2. राष्ट्रपति मुर्मू ने 22 जुलाई को उनका इस्तीफा मंजूर कर लिया, वे संसद की कार्यवाही और विदाई समारोह से दूर रहे।
  3. बीएसी की बैठक में जेपी नड्डा और रिजिजू की गैरमौजूदगी और अपमान को लेकर नाराजगी की बात सामने आई है।
  4. विपक्ष ने इस्तीफे के पीछे स्वास्थ्य नहीं, बल्कि राजनीतिक वजहों की आशंका जताई है।
  5. धनखड़ के कार्यकाल में उनके कई बयानों और फैसलों पर विपक्ष ने पक्षपात के आरोप लगाए थे, दिसंबर 2024 में उन पर महाभियोग भी लाया गया था।
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