Tuesday, July 21, 2026
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योग दिवस 2025: देशभर के 150 ऐतिहासिक स्थलों पर गूंजेगा ‘ओम’, संस्कृति मंत्रालय करेगा विशेष आयोजन

21 जून को 11वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस आने वाला है और इस बार सरकार इसे कुछ खास तरीके से मनाने जा रही है। संस्कृति मंत्रालय ने तय किया है कि इस मौके पर देश के 150 प्रमुख स्थलों पर विशेष योग अभ्यास सत्र आयोजित होंगे। इनमें 100 पर्यटन स्थल और 50 सांस्कृतिक धरोहर स्थल शामिल हैं।

अब इस पूरी पहल का मकसद केवल योग करना नहीं है, बल्कि इसे भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना भी है। ऐसा पहली बार होगा जब एलिफेंटा की गुफाओं से लेकर खजुराहो के मंदिरों तक, सुबह-सुबह ‘सूर्य नमस्कार’ करते हुए लोगों की कतारें दिखेंगी।

विशाखापट्टनम में मुख्य कार्यक्रम

राष्ट्रीय स्तर पर इस दिन का बड़ा आयोजन विशाखापट्टनम में हो रहा है। यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद योग सत्र में हिस्सा लेंगे। उनके साथ मंच पर होंगे आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण। यह एक तरह से उस नए राजनीतिक समीकरण का भी दृश्य होगा, जो केंद्र और राज्य के तालमेल को दिखाएगा।

इस पूरे आयोजन को आयुष मंत्रालय संभाल रहा है, लेकिन संस्कृति मंत्रालय की यह स्वतंत्र पहल काफी अलग और प्रभावशाली मानी जा रही है।

मेहरानगढ़ किले में खुद शामिल होंगे मंत्री

संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत खुद राजस्थान के जोधपुर स्थित ऐतिहासिक मेहरानगढ़ किले में योग दिवस कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। यह सिर्फ औपचारिकता नहीं है, बल्कि ये दिखाता है कि सरकार इस आयोजन को कितनी प्राथमिकता दे रही है।

कौन-कौन से स्थल होंगे शामिल

बात अगर जगहों की करें तो लिस्ट लंबी है, और काफ़ी रोचक भी। जैसे—

  • असम का चराइदेव मैदाम
  • गुजरात की रानी की वाव और धोलावीरा
  • कर्नाटक के हम्पी और पट्टदकल
  • मध्य प्रदेश के खजुराहो और सांची
  • ओडिशा का कोणार्क सूर्य मंदिर
  • महाराष्ट्र की एलिफेंटा गुफाएं
  • तमिलनाडु का बृहदेश्वर मंदिर

इनके अलावा दिल्ली में हुमायूं का मकबरा, पुराना किला और सफदरजंग टॉम्ब में भी योग सत्र होंगे। अमृतसर का जलियांवाला बाग, लद्दाख का लेह पैलेस और श्रीनगर का परी महल—सब कहीं योग से सुबह की शुरुआत होगी।

सरकारी संस्थाएं मोर्चा संभाल रही हैं

संस्कृति मंत्रालय की तमाम इकाइयां- जैसे पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग, क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र और अन्य जुड़े संस्थान- इस अभियान में एक्टिव रोल निभा रहे हैं। कार्यक्रम का खाका पहले ही राज्यों को भेजा जा चुका है। कई जगह स्थानीय कलाकारों के माध्यम से पारंपरिक प्रस्तुतियों के साथ योग को जोड़ने की भी योजना है।

योग और विरासत का संगम

सरकार की यह कोशिश दरअसल उस बड़े उद्देश्य की तरफ इशारा करती है, जहां योग को केवल स्वास्थ्य का नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा भी बनाया जा रहा है। योग, जो अब वैश्विक ब्रांड बन चुका है, उसे भारत की ज़मीन से जुड़ी असल विरासत के बीच वापस लाने की एक पहल कही जा सकती है।

संस्कृति मंत्रालय का यह योग-केंद्रित कदम दर्शाता है कि कैसे आज़ादी के बाद की पीढ़ी अब अपनी जड़ों की ओर लौटने लगी है, लेकिन एक नए, ठोस और संगठित तरीके से।

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