अब तक सोने के बदले लोन देना एक सीधी प्रक्रिया मानी जाती थी। गिरवी रखिए सोना, पाइए लोन। लेकिन अब रिजर्व बैंक ने इसमें थोड़ी पेचदगी जोड़ दी है। एसएंडपी ग्लोबल की एक रिपोर्ट आई है—गुरुवार को। इसमें साफ-साफ कहा गया कि नए नियमों से लोन देने वाली कंपनियों, खासकर NBFCs को अपने मॉडल में बदलाव करना होगा।
मुथूट फाइनेंस, मणप्पुरम जैसी कंपनियों पर असर साफ दिखेगा। ये वही कंपनियाँ हैं जिनकी गोल्ड लोन बुक काफी बड़ी है। इन्हें अब कोलेटरल वैल्यू के भरोसे काम नहीं चलेगा।
अब कैश फ्लो भी देखा जाएगा
बात बस इतनी नहीं है कि लोन देने से पहले सोना देखा जाए। अब कैश फ्लो—यानि कि उधार लेने वाले की आमदनी और खर्च का भी हिसाब लगाना होगा। रिपोर्ट में कहा गया कि अब सिर्फ गहनों की कीमत नहीं, उधारकर्ता की वापसी की क्षमता भी देखनी पड़ेगी।
पहले क्या होता था? गिरवी रखिए 10 ग्राम सोना और पाइए कुछ हज़ार या लाख रुपये तक लोन। अब रिजर्व बैंक कह रहा है—देखिए, बंदा चुका पाएगा या नहीं, पहले ये पता कीजिए।
एलटीवी की गणना भी बदलेगी
अब लोन-टू-वैल्यू रेशियो की नई परिभाषा आ गई है। अब तक जो रकम मिलती थी, वो सिर्फ सोने की कीमत पर आधारित थी। लेकिन आगे से ब्याज दरों को भी जोड़कर देखा जाएगा। मतलब—जितना लोन मिलना था, शायद अब थोड़ा कम मिले। क्योंकि ब्याज भी गिनती में आएगा।
फर्क क्या पड़ेगा? कंपनियों को एडवांस लोन देने में थोड़ा रोक लगानी पड़ सकती है। और वो रास्ते निकालेंगी, जाहिर है।
छोटे लोन, कम समय वाले लोन
रिपोर्ट कहती है कि आने वाले वक्त में कम अवधि वाले लोन—तीन या छह महीने के—ज्यादा देखने को मिल सकते हैं। इससे मध्यम और निम्न आय वाले लोगों को थोड़ी राहत मिल सकती है। उन्हें अपने गहनों से कुछ कैश तो मिल जाएगा, और चुकाने की टेंशन भी उतनी बड़ी नहीं होगी।
लेकिन यहां भी कंपनियों को अपनी स्कीम्स में फेरबदल करना पड़ेगा। सब कुछ उतना सीधा नहीं होगा अब।
रिन्यूअल की नई शर्तें
और हाँ, एक अहम बात और। अब लोन का रिन्यूअल यूं ही नहीं होगा। जब तक पिछला पूरा ब्याज नहीं चुका दिया जाए, तब तक लोन आगे नहीं बढ़ेगा। ये नियम एकदम क्लियर है। पहले क्या होता था—थोड़ा बहुत ब्याज बचा हो तो भी लोन रिन्यू हो जाता था। अब नहीं।
कंपनियों को अब हर रिन्यूअल से पहले पूरा हिसाब क्लियर करना होगा।
समय है, लेकिन तैयारी अभी से
नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे। लेकिन जैसा कि रिपोर्ट कहती है—बदलाव आज से शुरू करना होगा। खासकर उन कंपनियों के लिए जो पारंपरिक तरीके से काम कर रही थीं। जिनके पास फील्ड ऑफिसर हैं, लोन देने की टीम है—उन्हें अब ट्रेनिंग देनी होगी।
मतलब, सिस्टम भी बदलना है और सोच भी।
फिलहाल क्या है स्थिति
रिपोर्ट में कहा गया कि इस बदलाव से छोटे और मध्यम वर्गीय ग्राहकों को फायदा हो सकता है। लेकिन कंपनियों के लिए ये एक खर्चीला और धीमा प्रोसेस साबित हो सकता है। वे अब तक जितनी तेजी से लोन देते आए हैं, उसमें अब ब्रेक लगेगा।

- भारतीय रिजर्व बैंक के नए नियमों से गोल्ड लोन देने वाली एनबीएफसी कंपनियों के बिजनेस मॉडल में बदलाव की संभावना जताई गई है।
- रिपोर्ट के अनुसार अब उधारदाताओं को लोन देने से पहले उधारकर्ता की नकदी प्रवाह और चुकौती क्षमता का मूल्यांकन करना अनिवार्य होगा।
- मुथूट और मणप्पुरम जैसी कंपनियों को अब कोलेटरल वैल्यू पर निर्भर रहने के बजाय जोखिम प्रबंधन की नीति में बदलाव करना होगा।
- गोल्ड लोन के रिन्यूअल के लिए अब ब्याज का पूरा भुगतान ज़रूरी होगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी लेकिन लचीलापन घटेगा।
- नए नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे, लेकिन एनबीएफसी को तुरंत तैयारी शुरू करनी होगी ताकि संचालन में रुकावट न हो।

