पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा के हालिया छापेमारी अभियान पर सवाल खड़े किए हैं। गहलोत ने साफ कहा कि मंत्री खुद जाकर फैक्ट्रियों पर छापा मारें, यह परंपरा ठीक नहीं है।
गहलोत बोले—“ये काम अफसरों का होता है। अधिकारी पहले अपनी पूरी तैयारी करते हैं, जानकारी इकट्ठा करते हैं, फिर जाकर एक्शन होता है, लेकिन अगर मंत्री खुद छापा मारने लगे तो कई बार इसके नुकसान भी हो सकते हैं, जो मैं अभी सार्वजनिक रूप से नहीं कहूंगा।”
‘सब मिलकर छापे मारें तो ठीक’
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए गहलोत ने कहा—“अगर सरकार को वाकई करप्शन से लड़ना है तो फिर सारे मंत्री मिलकर निकलें, हर विभाग में जाकर देखें क्या हो रहा है। अगर हर जगह खामियां सामने आ जाएं और उन पर तुरंत कार्रवाई हो, तभी अच्छा प्रशासन कहा जाएगा।”
गहलाेत ने कहा कि अगर हाईकमान की हरी झंडी मिल गई है, तो फिर सब मंत्री यही तरीका अपनाएं। तभी राजस्थान एक ईमानदार राज्य बन सकता है। यह प्रयोग करके दिखाएं।”
विदेश नीति पर गहलोत का तीखा हमला
पूर्व मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर भी बात की। उन्होंने कहा—“भारत की हमेशा से एक खास पहचान रही है, हम किसी भी गुट में नहीं थे, लेकिन आज हालात कुछ और ही हैं। हमारे पड़ोसी देश—बांग्लादेश, श्रीलंका, भूटान—हमसे दूरी बना चुके हैं।”
गहलोत ने आरोप लगाया कि “पहलगाम हमले के बाद ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चला, लेकिन तब भी कोई देश खुलकर हमारे साथ नहीं आया। उल्टा पाकिस्तान के साथ चीन, तुर्की जैसे देश खड़े दिखे। यहां तक कि रूस, जो हमेशा भारत का करीबी रहा है, वो भी खामोश रहा।”
‘अब विदेश नीति लोगों को समझ नहीं आ रही’
गहलोत का कहना था कि आज की सरकार की विदेश नीति इतनी उलझी हुई है कि न देश के लोग समझ पा रहे हैं, न दुनिया। “हम दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक ताकत हैं। लोग हमसे उम्मीद करते हैं कि भारत क्या स्टैंड ले रहा है। लेकिन अब जो विदेश नीति है, वो खुद कंफ्यूज है।”

