देशभर में फैली 240 फर्जी कंपनियों के जरिए 524 करोड़ रुपए की टैक्स चोरी का बड़ा मामला सामने आया है। इस पूरी साज़िश का केंद्र बना जोधपुर, जहां से एक संगठित गैंग ने नकली दस्तावेजों के दम पर दर्जनों राज्यों में फर्जी फर्मों का रजिस्ट्रेशन करवाया। देवनगर थाना पुलिस ने इस सिलसिले में ई-मित्र संचालक समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया है।
DCP वेस्ट राजर्षि वर्मा के अनुसार, पुलिस को मसूरिया इलाके के एक ई-मित्र केंद्र से फर्जी आधार और दस्तावेज बनाने की शिकायत मिली थी। जब टीम ने जांच की तो पता चला कि ये लोग न केवल फर्जी दस्तावेज बना रहे थे, बल्कि इन्हें जीएसटी चोरी और साइबर ठगी में भी इस्तेमाल कर रहे थे।
फर्जी दस्तावेज से खुलते थे खाते
पकड़े गए आरोपियों में प्रवीण पंवार, सद्दाम हुसैन, किशन सिंह, रणवीर सिंह, गजेंद्र सिंह, चेलाराम और अमित भाटी शामिल हैं। ये लोग आधार, पैन और फोटोशॉप से तैयार नकली पहचान पत्र बनाकर उनका इस्तेमाल फर्जी बैंक खाते और जीएसटी रजिस्ट्रेशन में करते थे। फिर उन्हीं खातों से लेनदेन दिखाकर जीएसटी इनपुट क्लेम किया जाता था।
278 करोड़ के बिल, 246 करोड़ का पास-ऑन
जांच में सामने आया कि गैंग ने अब तक करीब 278 करोड़ रुपये की फर्जी इनवॉइसिंग कर इनपुट टैक्स क्लेम किया। इसके अलावा 246 करोड़ की फर्जी इनपुट टैक्स राशि दूसरों को पास-ऑन की गई। जीएसटी विभाग और पुलिस की संयुक्त जांच में 244 फर्मों की पहचान हो चुकी है, जिनमें से 152 फर्मों का रजिस्ट्रेशन पहले ही रद्द हो चुका था।
30 हजार में बिकते थे फर्जी डॉक्यूमेंट
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि आरोपी करीब 20 से 30 हजार रुपये में फर्जी पहचान पत्र तैयार करते थे। इसके बदले में गैंग सरगना इन दस्तावेजों का इस्तेमाल देशभर में फर्जी कंपनियां बनाने और अवैध ट्रांजैक्शन करने में करता था। इन फर्मों के नाम पर ई-वे बिल बनते थे और किसी तरह का कोई असली व्यापार नहीं होता था।
22 राज्यों में फैला जाल
पुलिस की पूछताछ में अब तक आंध्र प्रदेश, गोवा, महाराष्ट्र, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, कर्नाटक समेत कुल 22 राज्यों में फर्जी फर्मों की मौजूदगी की पुष्टि हो चुकी है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि टैक्स चोरी का यह आंकड़ा 524 करोड़ से भी ज्यादा हो सकता है।
देवनगर थाना पुलिस ने 13 जून को सबसे पहले प्रवीण पंवार और सद्दाम हुसैन को गिरफ्तार किया था। इनके बयान के बाद कड़ी दर कड़ी जोड़कर पुलिस ने पूरे नेटवर्क को बेनकाब किया। रिमांड पर लिए गए अन्य आरोपियों से पूछताछ जारी है।

