सोने की कीमतों में सोमवार, 30 जून 2025 को एक बार फिर से गिरावट देखी गई, जो हालिया वैश्विक आर्थिक घटनाओं और डॉलर की चाल से प्रभावित रही। इस साल अप्रैल में पहली बार 24 कैरेट सोना ₹1 लाख प्रति 10 ग्राम के ऐतिहासिक स्तर तक पहुंचा था, लेकिन तब से इसमें स्थायित्व नहीं रहा।
आज 24 कैरेट सोना 97,583 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा है, जबकि 22 कैरेट सोना 89,463 रुपये के स्तर पर है। दोनों कैरेट में आज के सत्र में गिरावट दर्ज की गई है, जो निवेशकों को सतर्क करती है कि सोने की चाल अब पूरी तरह वैश्विक घटनाक्रमों पर निर्भर है।
प्रमुख शहरों में ताजा दरें
दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े मेट्रो शहरों में भी कीमतों में गिरावट का असर साफ देखा गया। दिल्ली में 24 कैरेट सोना 97,583 और 22 कैरेट 89,460 रुपये पर बिक रहा है। मुंबई में ये दरें क्रमश: 97,437 और 89,317 रुपये रहीं।
बेंगलुरु, चेन्नई और कोलकाता जैसे आर्थिक रूप से सक्रिय शहरों में भी इसी तरह की प्रवृत्ति दर्ज की गई। चेन्नई में 24 कैरेट का भाव 97,431 रुपये और कोलकाता में 97,435 रुपये रहा।
डॉलर में कमजोरी, अंतरराष्ट्रीय बाजार मजबूत
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमजोर डॉलर और अमेरिका‑चीन व्यापार तनाव में नरमी के कारण स्पॉट गोल्ड की कीमतों में उछाल देखा गया। फिलहाल यह 0.3% की तेजी के साथ $3,281.65 प्रति औंस के स्तर पर है।
विश्लेषकों का कहना है कि डॉलर में गिरावट से सोने की खरीदारी अन्य मुद्राओं में सस्ती हो जाती है, जिससे मांग बढ़ती है और कीमतें ऊपर जाती हैं। लेकिन भारतीय बाजारों में GST, आयात शुल्क और स्थानीय डिमांड जैसे घरेलू कारक इसकी दरों पर असर डालते हैं।
ट्रंप-टैरिफ विवाद से फिर तनाव
इधर, अमेरिका और कनाडा के बीच नया व्यापारिक तनाव उभरता दिख रहा है। कनाडा द्वारा अमेरिकी कंपनियों पर अतिरिक्त टैक्स लगाने की खबर से राष्ट्रपति ट्रंप भड़क गए हैं। उन्होंने कनाडा के साथ व्यापारिक वार्ता स्थगित कर दी है और अगले सप्ताह तक टैरिफ लागू करने की चेतावनी दी है।
हालांकि चीन के साथ रेयर अर्थ के मुद्दे पर सहमति बनने से एक तरफ वैश्विक तनाव में थोड़ी नरमी आयी है, लेकिन ट्रंप की आक्रामक व्यापार नीति निवेशकों के लिए एक बार फिर चिंता का कारण बन सकती है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत हैं?
सोने में उतार-चढ़ाव की मौजूदा लय यह बताती है कि यह परिसंपत्ति वर्ग अब पूरी तरह से बाहरी संकेतों पर प्रतिक्रिया दे रहा है। डॉलर की दिशा, व्यापारिक कूटनीति, ब्याज दर के अनुमान और केंद्रीय बैंक नीतियां सोने के निवेश को दिशा देने में निर्णायक साबित हो रही हैं।
निवेशकों को इन अस्थिर कारकों के बीच संतुलित रणनीति अपनानी होगी। अल्पकालिक लाभ की तलाश में तेजी से खरीद-बिक्री करने वालों को खास सतर्कता बरतनी होगी, जबकि दीर्घकालिक निवेशकों को कीमतों की स्थायित्व पर नज़र रखनी चाहिए।

