मंगलवार, जून 9, 2026
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महीने के आखिरी दिन शेयर बाजार फिसला, ऑटो-बैंकिंग सेक्टर पर दबाव, निवेशकों की नजर मैक्रो आंकड़ों पर टिकी

महीने के आखिरी कारोबारी दिन घरेलू शेयर बाजार ने उम्मीदों के उलट कमजोरी दिखाई, जबकि वैश्विक संकेत सकारात्मक बने हुए थे। एशियाई बाजारों में तेजी, अमेरिकी टैरिफ वार्ता में नरमी और वैश्विक कच्चे तेल की स्थिर कीमतों के बावजूद भारतीय स्टॉक मार्केट सोमवार सुबह दबाव में रहा। शुरुआती सत्र में बीएसई सेंसेक्स 124.32 अंक यानी 0.15% गिरकर 83,935.89 पर खुला, वहीं एनएसई निफ्टी-50 31.20 अंक की गिरावट के साथ 25,606.40 के स्तर पर कारोबार करता दिखा।

बैंकिंग और ऑटो स्टॉक्स में कमजोरी

सुबह के कारोबार में जिन प्रमुख शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, उनमें हीरो मोटोकॉर्प, एनटीपीसी, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, भारती एयरटेल और एचडीएफसी बैंक प्रमुख हैं। खासतौर पर बैंकिंग सेक्टर की दिग्गज कंपनियों में बिकवाली का रुख देखने को मिला, जो कि मिड-टर्म निवेशकों के लिए चिंता का विषय बन सकता है।

तेजी दिखाने वाले प्रमुख स्टॉक्स

इसके उलट, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज, एटरनल, ओएनजीसी, ट्रेंट और इंडसइंड बैंक जैसे स्टॉक्स में खरीदारी देखने को मिली। इन कंपनियों की हालिया कारोबारी घोषणाएं और मजबूत बैलेंसशीट के चलते बाजार ने इन्हें तरजीह दी।

एशियाई बाजारों में रही मजबूती

एशिया से मिले संकेत बाजार के लिए अनुकूल रहे। जापान का निक्केई 1.6% और टॉपिक्स इंडेक्स 1% चढ़ा, वहीं कोरिया का कोस्पी 0.64% और ऑस्ट्रेलिया का ASX 200 इंडेक्स 0.19% की बढ़त के साथ बंद हुआ। इस तेजी का घरेलू बाजार पर सीमित असर दिखा, क्योंकि निवेशकों की नजर घरेलू आंकड़ों और अमेरिकी नीतिगत घटनाक्रमों पर टिकी रही।

आर्थिक आंकड़ों से तय होगी चाल

बाजार विश्लेषकों के अनुसार, अगले कुछ कारोबारी दिनों में औद्योगिक उत्पादन (IIP), विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के पीएमआई जैसे प्रमुख वृहद आर्थिक आंकड़ों का असर बाजार की दिशा तय करेगा।

बजाज ब्रोकिंग रिसर्च ने अपने नोट में कहा है कि भारतीय और अमेरिकी आर्थिक डेटा इस सप्ताह बाजार सेंटीमेंट को तय करेंगे। वहीं, जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर का कहना है कि पहली तिमाही के नतीजों से पहले कंपनियों के प्रदर्शन से जुड़े प्रारंभिक संकेतकों पर बाजार की नजर बनी रहेगी।

महीने की शुरुआत में आंकड़ों की बौछार

30 जून को मई महीने का औद्योगिक उत्पादन, 1 जुलाई को विनिर्माण पीएमआई और 3 जुलाई को सर्विस पीएमआई के आंकड़े जारी होंगे। इन आंकड़ों से भारत की आर्थिक गतिविधियों, मांग, और ऑर्डर फ्लो की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी, जो आने वाले दिनों में निवेशक रणनीतियों और पॉलिसी दिशा को प्रभावित कर सकती है।

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