गुरूवार, जून 4, 2026
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राजस्थान में फाइटर जेट हादसा: रोहतक के स्क्वॉड्रन लीडर लोकेंद्र सिंह सिंधु शहीद

राजस्थान के चुरू जिले में बुधवार दोपहर भारतीय वायुसेना का एक जगुआर ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट क्रैश हो गया। इस दुखद हादसे में हरियाणा के रोहतक निवासी स्क्वॉड्रन लीडर लोकेंद्र सिंह सिंधु (32) शहीद हो गए। लोकेंद्र, रोहतक की देव कॉलोनी में रहते थे और भारतीय वायुसेना में 2011 से अपनी सेवाएं दे रहे थे।

हादसे के वक्त उड़ान पर थे

बुधवार को दोपहर करीब 12:40 बजे वायुसेना का दो-सीटर जगुआर जेट सूरतगढ़ एयरबेस से उड़ान भरने के बाद चुरू के पास क्रैश हो गया। यह जेट ट्रेनिंग मिशन पर था। हादसे के दौरान पायलट और को-पायलट दोनों शहीद हो गए। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक पायलट तकनीकी कारणों से समय रहते इजेक्ट नहीं कर सके, जिससे उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। मलबे के पास से शवों के क्षत-विक्षत टुकड़े बरामद किए गए हैं।

शहीद पायलट की पहचान हुई

शहीद पायलट की पहचान स्क्वॉड्रन लीडर लोकेंद्र सिंह सिंधु के रूप में हुई है, जो हाल ही में पिता बने थे। दस जून को उनके घर बेटे का जन्म हुआ था और 30 जून को वह ड्यूटी पर वापस लौटे थे। हादसे की सूचना मिलने के बाद रोहतक स्थित उनके घर में मातम का माहौल है।

परिवार में पसरा मातम

लोकेंद्र के पिता जोगेंद्र सिंह सिंधु महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी (MDU) से अधीक्षक पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उनकी पत्नी सुरभि सिंधु डॉक्टर हैं। हादसे की जानकारी सबसे पहले सुरभि को उनके भाई ने दी, जो खुद वायुसेना में तैनात हैं। परिवार के मुताबिक लोकेंद्र ने बचपन से ही आसमान को छूने का सपना देखा था। वह अक्सर कहते थे—“मैं उड़ने के लिए ही बना हूं।”

आखिरी बातचीत और शेयर की बेटे की तस्वीर

हादसे वाले दिन सुबह लोकेंद्र ने 10 बजे अपने पिता को फोन किया था। उन्होंने परिवार के वॉट्सऐप ग्रुप पर अपने बेटे की तस्वीर भी साझा की थी। बड़े भाई ज्ञानेंद्र ने बताया कि लोकेंद्र बेटे का चेहरा बार-बार देखने की बात कह रहे थे।

देशसेवा के जज़्बे से चुनी थी वायुसेना

लोकेंद्र की पहली पोस्टिंग कर्नाटक के बीदर में हुई थी, उसके बाद वह पश्चिम बंगाल और फिर सूरतगढ़ एयरबेस पर तैनात रहे। उनकी बहन अंशी भी पहले वायुसेना में थीं और अब रिटायर हो चुकी हैं। उनके जीजा अब भी विंग कमांडर हैं।

कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी होगी शुरू

वायुसेना ने इस दुर्घटना की जांच के लिए कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी का गठन कर दिया है। प्रारंभिक तौर पर यह एक तकनीकी गड़बड़ी का मामला माना जा रहा है, लेकिन जांच के बाद ही इसकी पुष्टि हो सकेगी।

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