वर्ल्ड बॉक्सिंग कप में भारत ने शानदार प्रदर्शन कर 11 मेडल जीते हैं। जिनमें तीन गोल्ड, 5 सिल्वर और 3 ब्राँज मेडल हैं। भारतीय टीम में 20 सदस्य शामिल थे। खास बात ये है कि इनमें तीन गोल्ड हरियाणा की बेटियों के नाम रहे।
साक्षी ढांडा, जैस्मीन लंबोरिया और नूपुर श्योराण — ये तीन नाम ब्राज़ील के रिंग में तिरंगे की शान बनकर लहराए। तीनों ही भिवानी की हैं, वही भिवानी जिसे बॉक्सिंग की ‘मिनी क्यूबा’ कहा जाता है।
साक्षी का पंच, पहला गोल्ड
54 किग्रा वर्ग के फाइनल में साक्षी ने अमेरिकी मुक्केबाज़ योसलाइन पेरेज़ को एकतरफा अंदाज़ में हराया। पंच सटीक थे, फुटवर्क मजबूत और आत्मविश्वास गज़ब का। भारत के लिए यह पहला गोल्ड था।
जैस्मीन की रफ्तार ने रचा कमाल
57 किग्रा वर्ग में जैस्मीन ने ब्राज़ील की जुसीलेन सेक्वेरा को 4:1 से मात दी। लंबी पहुंच और सधी हुई टाइमिंग ने फर्क पैदा किया। आखिरी राउंड में एक क्लीन हुक ने मैच का रुख पलट दिया।
नूपुर की वापसी ने चौंकाया
80+ किग्रा कैटेगरी के फाइनल में नूपुर शुरू में पिछड़ रही थीं। पहले राउंड में कज़ाकिस्तान की तालीपोवा आक्रामक दिखीं, लेकिन अगले दो राउंड में नूपुर ने दमदार वापसी की — फुटवर्क बदला, गार्ड नीचे नहीं जाने दिया और पंच सीधे टारगेट पर। स्कोर था 5:0।
रजत पदक: कई उम्मीदें अधूरी रहीं
11 मेडल्स में 5 रजत भी शामिल रहे। इनमें हितेश गुलिया, जुगनू अहलावत, पूजा रानी, अभिनाश जामवाल और मीनाक्षी जैसे नाम रहे जिन्हें फाइनल में हार का सामना करना पड़ा।
गुलिया को इस बार ब्राज़ील के कायन ओलिवेरा ने 0:5 से हरा दिया — पिछली बार वे गोल्ड जीत चुके थे। वहीं जुगनू और पूजा को भी क्रमशः कज़ाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया की बॉक्सर से शिकस्त मिली।
3 कांस्य भी भारत के खाते में
संजू (महिला 60 किग्रा), निखिल दुबे (75 किग्रा) और नरेन्द्र (90+ किग्रा) ने ब्रॉन्ज मेडल से भारत का खाता और भी भरा। मुकाबले मुश्किल थे, लेकिन जुझारूपन ने भारत के लिए पोडियम पक्का किया।
भिवानी ने फिर दिखाया दम
भारत की बॉक्सिंग का दिल अगर कहीं धड़कता है, तो वो है भिवानी। साक्षी, जैस्मीन और नूपुर के अलावा सिल्वर विजेता जुगनू और पूजा भी इसी मिट्टी के हैं। एक बार फिर भिवानी ने साबित किया कि भारत की मुक्केबाज़ी में उसका दबदबा कम नहीं हुआ।

