पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे रविवार को अजमेर जिले के अरांई के सिरोंज गांव पहुंचीं, जहां दिवंगत पूर्व मंत्री प्रो. सांवरलाल जाट की प्रतिमा का अनावरण किया गया। इस दौरान जनसभा को संबोधित करते हुए वे भावुक हो गईं। उन्होंने कहा, “भैरोंसिंह शेखावत, सांवरलाल जाट और दिगंबर सिंह के चले जाने से न केवल प्रदेश, बल्कि मुझे भी गहरा नुकसान हुआ है। अगर आज वे होते, तो मदद करने से कभी पीछे नहीं हटते।”
राजनीति में अनुशासन का प्रतीक रहे
वसुंधरा ने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि प्रो. जाट राजनीति में पूर्व उपराष्ट्रपति भैरोंसिंह शेखावत की ‘स्कूल’ के छात्र थे। उन्होंने बताया कि जाट जी की इच्छा अजमेर से लोकसभा चुनाव लड़ने की नहीं थी, लेकिन वे पार्टी के अनुशासन के कारण मैदान में उतरे और जीत हासिल की।
एक चेहरे पर कई चेहरे नहीं थे
राजे ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर लिखा, “मौसम और इंसान कब बदल जाए, कोई भरोसा नहीं। राजनीति में आजकल एक चेहरे पर कई चेहरे लगा लेते हैं, मगर प्रो. सांवरलाल जाट ऐसे नहीं थे। वे आखिरी सांस तक मेरे साथ खड़े रहे।”
केंद्रीय मंत्री और विधायकों ने भी किया याद
केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी ने कहा, “उनका जीवन संघर्ष और सेवा की मिसाल है। उन्होंने किसानों के हितों के लिए दिल्ली से जयपुर तक आवाज उठाई।”
नसीराबाद विधायक रामस्वरूप लांबा ने कहा कि यह प्रतिमा सिर्फ उनके पिता की नहीं, बल्कि एक विचार और मूल्यों की पहचान है। वहीं किशनगढ़ विधायक विकास चौधरी ने उन्हें राजस्थान की राजनीति का “मजबूत स्तंभ” बताया।
‘किसानों के सच्चे हितैषी थे जाट’
राजे ने कहा कि सांवरलाल जाट ने हमेशा किसानों, गरीबों और आम जनता के लिए काम किया। वे अपने क्षेत्र तक सीमित नहीं थे, उन्होंने पूरे राजस्थान को अपना परिवार माना। उनकी सादगी, समर्पण और पारदर्शिता उन्हें आज भी जनमानस में जीवित बनाए हुए हैं।

