रविवार, मई 3, 2026
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अंतरिक्ष मिशन Axiom-4 की लाॅन्चिंग 25 जून को संभव, अब तक छह बार टल चुका, डायबिटीज पर भी होगी रिसर्च

अंतरिक्ष मिशन Axiom-4 मिशन को 25 जून को दोपहर 12:01 बजे (भारतीय समयानुसार) लॉन्च किया जा सकता है। अगर सब कुछ प्लान के मुताबिक चला, तो यह मिशन अगले ही दिन, यानी 26 जून की शाम 4:30 बजे इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) से डॉक कर जाएगा। लॉन्चिंग के लिए स्पेसएक्स का फॉल्कन 9 रॉकेट इस्तेमाल होगा, जिसमें चार देशों के चार एस्ट्रोनॉट्स एक साथ सवार होंगे।

भारत के लिए दूसरी अंतरिक्ष उड़ान

शुभांशु इस मिशन में पायलट की भूमिका में होंगे और अगर सबकुछ ठीक रहा, तो वह ISS पर कदम रखने वाले भारत के पहले व्यक्ति बन जाएंगे। स्पेस में जाने वाले वह दूसरे भारतीय होंगे। इससे पहले 1984 में राकेश शर्मा ने सोवियत मिशन के ज़रिए अंतरिक्ष की यात्रा की थी।

Axiom-4 की कमान अनुभवी अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री पैगी व्हिटसन के हाथों में है। शुक्ला के अलावा हंगरी के टिबोर कापू और पोलैंड के स्लावोज उज़्नान्स्की इस मिशन में बतौर मिशन एक्सपर्ट शामिल हैं। ये सभी 14 दिन तक ISS में रहेंगे।

छह बार टल चुका है मिशन

वैसे ये मिशन अपने-आप में जितना रोमांचक है, उसकी राह उतनी ही अड़चनों से भरी रही है। पिछले एक महीने में 6 बार लॉन्चिंग टाली जा चुकी है—29 मई, 8, 10, 11, 12 और 22 जून को लॉन्चिंग की प्लानिंग बनी, लेकिन हर बार ISS के ज़्वेज़्दा मॉड्यूल में चल रहे मेंटेनेंस और सेफ्टी रिव्यू की वजह से मिशन को स्थगित करना पड़ा। NASA और SpaceX की टीमें मिशन को लेकर बेहद सतर्क हैं।

डायबिटीज रिसर्च की पहली उड़ान

अब इस मिशन की खास बात पर आते हैं—Axiom-4 को सिर्फ अंतरिक्ष यात्रा नहीं बल्कि मेडिकल रिसर्च के लिहाज़ से भी ऐतिहासिक कहा जा सकता है। UAE की हेल्थ टेक कंपनी बुर्जील होल्डिंग्स इस मिशन के दौरान स्पेस में इंसुलिन और ब्लड शुगर के व्यवहार पर रिसर्च करेगी।

शुभांशु और बाकी क्रू सदस्य सूट राइड एक्सपेरिमेंट के तहत 14 दिन तक स्पेशल ब्लड ग्लूकोज मॉनिटर पहनेंगे। मकसद है समझना कि माइक्रोग्रैविटी में शरीर में ग्लूकोज लेवल किस तरह बदलता है। अबू धाबी स्थित बुर्जील होल्डिंग्स के चीफ़ मेडिकल ऑफिसर डॉ. मोहम्मद फितयान ने पीटीआई को बताया—”हम देखना चाहते हैं कि अंतरिक्ष में इंसान के ब्लड शुगर में कोई पैटर्न बनता है या नहीं।”

इंसुलिन पेन भी ले जाएंगे एस्ट्रोनॉट

इस रिसर्च के तहत स्पेस में इंसुलिन पेन भी भेजे जाएंगे। इन्हें अलग-अलग तापमान में रखा जाएगा ताकि यह समझा जा सके कि अंतरिक्ष में इंसुलिन के अणु कैसे बर्ताव करते हैं। अभी तक NASA की पॉलिसी रही है कि इंसुलिन लेने वाले डायबिटिक पेशेंट्स को स्पेस जाने की इजाज़त नहीं दी जाती। हालांकि इंसुलिन न लेने वाले माइल्ड केस में कोई रोक नहीं है—लेकिन अब तक ऐसा कोई मिशन नहीं हुआ जिसमें डायबिटीज से ग्रस्त कोई व्यक्ति स्पेस गया हो।

7 भारतीय साइंटिस्ट्स के एक्सपेरिमेंट

Axiom-4 मिशन सिर्फ मेडिकल रिसर्च तक सीमित नहीं है। इस बार कुल 60 एक्सपेरिमेंट स्पेस में किए जाएंगे, जिनमें 7 भारतीय वैज्ञानिकों के डिजाइन किए गए प्रयोग भी शामिल हैं। इनमें माइक्रोग्रैविटी में स्प्राउट्स का अंकुरण, फसलों के बीजों पर असर, एल्गी पर रेडिएशन का प्रभाव जैसे महत्वपूर्ण विषय हैं।

मिशन की हर परत से जुड़ा भारत

फिलहाल, ISRO भले इस मिशन का हिस्सा नहीं है, लेकिन भारत इस मिशन के हर स्तर पर दिख रहा है—शुभांशु शुक्ला के ज़रिए, भारतीय वैज्ञानिकों के रिसर्च प्रोजेक्ट्स के ज़रिए और एक नई वैज्ञानिक दिशा के ज़रिए। अब सारी निगाहें 25 जून पर टिकी हैं—और अगर मौसम और टेक्निकल स्थितियाँ साथ रहीं, तो ये भारत के अंतरिक्ष इतिहास में दर्ज होने वाला एक और यादगार दिन होगा।

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