रविवार, मई 3, 2026
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18 दिन अंतरिक्ष में रहकर देश लौटे ग्रुप कैप्टन शुभांशु, पत्नी को गले लगाया, बेटे को गोद में उठाया

भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन और एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला मंगलवार को 18 दिन अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) में रहने के बाद धरती पर लौटे। बुधवार को लखनऊ पहुंचने पर उन्होंने पत्नी कामना और 6 साल के बेटे किआश से मुलाकात की। लंबे इंतजार के बाद हुए इस मिलन के भावुक दृश्य खुद शुभांशु ने इंस्टाग्राम पर साझा किए।

उन्होंने लिखा, “अंतरिक्ष की उड़ान अद्भुत होती है, लेकिन अपनों से मिलना और भी अद्भुत होता है। जब परिवार को गले लगाया, तो लगा जैसे घर आ गया।”

मिशन से पहले दो महीने रहे क्वारंटीन

शुभांशु ने बताया कि स्पेस मिशन से पहले वह करीब दो महीने क्वारंटीन में रहे। इस दौरान परिवार से 8 मीटर की दूरी बनाकर रखनी होती थी ताकि अंतरिक्ष स्टेशन में कोई संक्रमण न पहुंचे। बेटे किआश को समझाया गया था कि वह पापा को नहीं छू सकता। बेटे की मासूमियत भरी बातें भी शुभांशु ने साझा कीं— “वो हर बार पूछता, क्या अब हाथ धोकर पापा को छू सकता हूं?”

25 जून को हुई थी अंतरिक्ष के लिए रवाना

शुभांशु शुक्ला 25 जून को एक्सियम मिशन-4 (Ax-4) के तहत अंतरिक्ष के लिए रवाना हुए थे। 26 जून को भारतीय समयानुसार शाम 4:01 बजे अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पहुंचे। वहां 18 दिन तक वैज्ञानिक अनुसंधानों में हिस्सा लेने के बाद 15 जुलाई को वह धरती पर लौटे। उनकी स्पेस कैप्सूल की लैंडिंग कैलिफोर्निया के तट पर हुई।

वैज्ञानिक प्रयोगों और संवादों से रहा व्यस्त शेड्यूल

स्पेस मिशन के दौरान शुभांशु ने 60 से अधिक वैज्ञानिक प्रयोगों में भाग लिया। इनमें भारत के सात प्रयोग शामिल थे। उन्होंने अंतरिक्ष में मेथी और मूंग के बीज उगाने, स्पेस माइक्रोएल्गी और हड्डियों पर भारहीनता के प्रभाव जैसे अहम शोध कार्य किए।

28 जून को उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से स्पेस स्टेशन से वीडियो कॉल पर बातचीत की। प्रधानमंत्री ने हल्के-फुल्के अंदाज़ में पूछा, “क्या आप गाजर का हलवा साथ ले गए थे?” इस पर शुभांशु ने हंसते हुए जवाब दिया कि हां, साथियों के साथ बैठकर खाया।

इसके अलावा 3, 4 और 8 जुलाई को उन्होंने तिरुवनंतपुरम, बेंगलुरु और लखनऊ के 500 से अधिक छात्रों से हैम रेडियो के माध्यम से संवाद किया। इसका उद्देश्य STEM (विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित) के प्रति बच्चों और युवाओं में रुचि बढ़ाना था।

ISRO से भी हुई अहम बातचीत

6 जुलाई को शुभांशु ने ISRO के चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन सहित वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने अपने प्रयोगों और भारत के गगनयान मिशन में उपयोगी अनुभवों को साझा किया। इसके अलावा उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन के कपोला मॉड्यूल से पृथ्वी की दुर्लभ और सुंदर तस्वीरें भी लीं।

“स्पेस मिशन जादुई हैं, लेकिन उन्हें इंसान बनाते हैं खास”

मिशन के बाद अपने सोशल मीडिया पोस्ट में शुभांशु ने लिखा, “स्पेस मिशन जादुई होते हैं, लेकिन उन्हें इंसान ही जादुई बनाता है। आज ही किसी अपने को गले लगाइए और बताइए कि आप उन्हें कितना चाहते हैं। हम जीवन में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि अपनों की अहमियत भूल जाते हैं।”

41 साल बाद किसी भारतीय ने की स्पेस यात्रा

शुभांशु शुक्ला अंतरिक्ष में जाने वाले भारत के दूसरे और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तक पहुंचने वाले पहले भारतीय हैं। उनसे पहले वर्ष 1984 में राकेश शर्मा ने सोवियत संघ के अंतरिक्ष मिशन के तहत उड़ान भरी थी। शुभांशु को NASA और ISRO के संयुक्त मिशन के तहत चुना गया था।

गगनयान मिशन में निभाएंगे बड़ी भूमिका

शुभांशु का यह मिशन भारत के महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन के लिए महत्वपूर्ण अनुभव के तौर पर देखा जा रहा है। गगनयान मिशन भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन होगा, जिसे 2027 में लॉन्च किए जाने की संभावना है। इस मिशन में भारतीय गगनयात्रियों को पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजा जाएगा और सुरक्षित वापस लाया जाएगा।

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