कन्नड़ फिल्म अभिनेत्री रान्या राव को 14 किलो सोने की तस्करी के मामले में एक साल की सजा सुनाई गई है। बुधवार को यह फैसला विदेशी मुद्रा संरक्षण और तस्करी गतिविधियों की रोकथाम अधिनियम (COFEPOSA) के तहत सलाहकार बोर्ड ने सुनाया। खास बात यह रही कि बोर्ड ने उन्हें पूरी सजा के दौरान जमानत देने से इनकार कर दिया है।
कोर्ट ने क्यों दी थी पहले डिफॉल्ट जमानत
इससे पहले 20 मई को बेंगलुरु की एक अदालत ने रान्या और उनके सह-आरोपी तरुण राजू को प्रक्रिया से जुड़ी खामियों के कारण डिफॉल्ट जमानत दी थी। डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) तय समयसीमा में चार्जशीट दाखिल नहीं कर पाया था, जिससे उन्हें दो लाख रुपये के बॉन्ड और सख्त शर्तों के साथ जमानत दी गई थी। इनमें देश छोड़ने और अपराध दोहराने पर रोक लगाई गई थी।
COFEPOSA में हिरासत का अधिकार
हालांकि डिफॉल्ट जमानत मिलने के बावजूद, दोनों को हिरासत में ही रखा गया। COFEPOSA कानून अधिकारियों को संदेह के आधार पर भी एक साल तक रोकथामात्मक हिरासत की अनुमति देता है। यही आधार बनाकर अब उन्हें जमानत से वंचित किया गया है।
मार्च में हुई थी गिरफ्तारी, दुबई से लाया था सोना
पूरा मामला 3 मार्च 2025 का है, जब रान्या राव बैंगलोर के केंपगौड़ा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर दुबई से लौटी थीं। सुबह करीब 6 बजे, वह ग्रीन चैनल से बाहर निकलने की कोशिश कर रही थीं। ग्रीन चैनल उन यात्रियों के लिए होता है, जिनके पास डिक्लेयर करने लायक कोई सामान नहीं होता।
तलाशी के दौरान उनके पास से 14.2 किलोग्राम सोना बरामद किया गया, जिसकी कीमत करोड़ों रुपये में बताई गई। रान्या राव, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के. रामचंद्र राव की सौतेली बेटी हैं।
जमानत याचिकाएं पहले भी हो चुकी हैं खारिज
कोर्ट दस्तावेजों से पता चलता है कि रान्या की जमानत याचिकाएं पहले भी खारिज होती रही हैं। 14 मार्च को विशेष आर्थिक अपराध अदालत, 27 मार्च को सेशंस कोर्ट और 26 अप्रैल को कर्नाटक हाईकोर्ट ने उनकी याचिकाओं को नामंजूर कर दिया था।
फिलहाल, रान्या को एक साल की सजा भुगतनी होगी और उसे इस अवधि में जमानत नहीं मिल सकेगी। यह मामला एक बार फिर सोना तस्करी और एयरपोर्ट सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

