राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एमएम श्रीवास्तव भी साइबर अपराध की चपेट में आने से बाल-बाल बचे। एक सुनवाई के दौरान उन्होंने खुलासा किया कि उन्हें भी एक बार डिजिटल अरेस्ट जैसे संदिग्ध कॉल का सामना करना पड़ा था। उन्होंने सतर्कता बरती और कॉल की सूचना तुरंत हाईकोर्ट रजिस्ट्रार को देकर संभावित ठगी से खुद को सुरक्षित किया।
हाईकोर्ट ने खुद लिया संज्ञान
मुख्य न्यायाधीश श्रीवास्तव और जस्टिस मनीष शर्मा की खंडपीठ डिजिटल अरेस्ट व साइबर फ्रॉड से जुड़ी याचिका पर सुनवाई कर रही थी। कोर्ट ने बताया कि उसने जनवरी 2024 में इन बढ़ते मामलों पर स्वतः संज्ञान लिया था। लेकिन अब तक केंद्र और राज्य सरकार ने इस पर कोई ठोस जवाब दाखिल नहीं किया है।
फ्रॉड से जान गंवा चुके हैं लोग
कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि कई पीड़ितों ने न सिर्फ अपनी पूरी जमापूंजी गंवाई है बल्कि कुछ ने तो जान तक दे दी है। कोर्ट ने इसे एक गंभीर सामाजिक संकट बताया और सरकार से स्पष्ट जवाब और ठोस कार्य योजना पेश करने को कहा है।
RBI को भी दिए गए सख्त निर्देश
राज्य सरकार के प्रयासों को नाकाफी बताते हुए हाईकोर्ट ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को निर्देश दिए कि वह साइबर अपराध रोकने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाए। सिर्फ दिशानिर्देश नहीं, बल्कि लागू करने लायक व्यवस्था जरूरी है।
सार्वजनिक सुरक्षा के लिए सिस्टम जरूरी
कोर्ट ने कहा कि आम जनता को फिशिंग कॉल्स, फर्जी पोर्टल्स और ऑनलाइन जालसाजी से बचाने के लिए एक केंद्रीकृत और तेज़ कार्य प्रणाली की जरूरत है। साथ ही, शिकायत निवारण तंत्र को सशक्त करने की सिफारिश की गई है ताकि हर नागरिक की मेहनत की कमाई सुरक्षित रह सके।

